Friday, 15 July 2011

आईएएस का हिसाब चुकता, भूल-चूक लेनी-देनी

गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में की गई एक आईएएस अफसर की विदेश यात्रा को वित्त विभाग ने नियमित तो कर दिया, लेकिन बिना बजट के।  ये आईएएस महोदय यात्रा नियमित होने पर सरकार से यात्रा भत्ते का भुगतान लेने की तैयारी किए बैठे थे। अब पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि चूंकि विदेश यात्रा हो चुकी थी, इसलिए उसका तो कुछ हो नहीं सकता था, लेकिन बजट नहीं देकर सरकार ने आईएएस महोदय के करीब 1.50 से 2.00 लाख रुपए पर पानी फेर दिया। यदि वित्तीय स्वीकृति मिलती तो इतना भुगतान तो उनका बनता ही। यानी हिसाब चुकता, भूल-चूक लेनी देनी। 
हुआ यह कि आईएएस अधिकारी दामोदर शर्मा गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में बुनकर संघ के अध्यक्ष राधेश्याम तंवर और अन्य अफसरों के साथ फ्रेंकपर्ट की यात्रा करने गए थे। वहीं लगे हाथ दो -तीन और देशों की यात्रा भी कर आए, और यात्रा भी बिजनेस क्लास में की। लौटने पर आईएएस महोदय ने अधिक दिन की यात्रा को नियमित करने की अर्जी दे दी। तत्कालीन सरकार ने उस समय इस यात्रा को नियमित करने से इंकार कर दिया। परन्तु भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने जाते-जाते इस यात्रा को नियमित कर दिया। 
आईएएस महोदय को जैसे ही पता चला कि उनकी विदेश यात्रा को मुख्यमंत्री ने नियमित कर दिया है तो उन्होंने तुरंत  बिल पेश कर दिए। उद्योग विभाग में बैठे अधिकारी भी कुछ कम नहीं थे। उन्होंने मामला वित्त विभाग को भेज दिया। वित्त विभाग के अटकाऊटेंटों ने सरकार का हित देखते हुए तुरंत कह दिया कि  यात्रा को कार्मिक विभाग ने नियमित किया है, इसलिए वित्त विभाग भी बिना बजट के यात्रा को नियमित करता है। फाइल की ये नोटिंग सभी जगह से रूटीन में ही अनुमोदित होकर आ गई। आम लोगों के काम अटकाने वालों के काम कभी-कभी अटकते हैं, क्या फर्क पड़ता है।

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