Friday, 24 June 2011

पीआरओ ने दर्ज कराया अतिरिक्त निदेशक के खिलाफ छुआछूत का मामला

पदोन्नति में आरक्षण मुद्दे से सरकारी कर्मचारियों में पनपी वर्ग- भेद की भावना का असर अब दिखने लगा है। सरकार के कारिंदे अब आरक्षित और अनारक्षित वर्गों में बंट गए हैं। इसी भावना के साथ काम करने लगे हैं। हाल ही  सूचना एवं जन संपर्क महकमे के एक जन संपर्क अधिकारी ने अपने ही विभागीय अतिरिक्त निदेशक के खिलाफ जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और गाली-गलौच करने का मामला पुलिस में दर्ज करवा दिया है। 
इसी विभाग में इसी तरह की एक और घटना चर्चा में है। इसमें अल्पसंख्यक वर्ग के एक पत्रकार ने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले संवाद के एक अधिकारी की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में कर दी। इन दोनों ही घटनाओं को पदोन्नति में आरक्षण मसले से जोड़कर देखा जा रहा है। इसकी वजह ये है कि अतिरिक्त निदेशक  के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले जनसंपर्क अधिकारी आरक्षण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अनुसूचित जाति के जिस अधिकारी के खिलाफ पत्रकार के माध्यम से शिकायत करवाई गई है, उसमें भी संबंधित अधिकारी विभाग के ही कुछ  सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर संदेह कर रहे हैं। 
इनके साथ ही कई अन्य विभागों में भी इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि जहां अनुसूचित जाति के अधिकारी उच्च पदों पर बैठे हैं, वहां सामान्य वर्ग के कनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों को या तो चार्जशीट थमाई जा रही है अथवा उन पर छोटी-छोटी बातों को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है, ताकि आरक्षित वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। 
पॉवर गेलेरी के पॉवर फुल लोगों का मानना  है कि सरकार खुद वर्ग संघर्ष  को बढ़ावा दे रही है। आगे चलकर यह समस्या और भी विकराल हो सकती है। इसलिए सरकार को इस मसले पर जल्द फैसला करने की जरूरत है। 

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