Tuesday, 14 June 2011

वित्तीय सलाह देना भी भारी पड़ गया

राजस्थान खाद्य आपूर्ति निगम के वित्तीय सलाहकार को फाइल पर क्लिष्ट भाषा में सलाह देना भारी पड़ गया। फाइल की नोटशीट पर वित्तीय सलाहकार ने सलाह में जिस तरह की क्लिष्ट भाषा का इस्तेमाल किया, उसे पढ़कर बड़े अफसर का दिमाग चकरा गया। वे जिस काम को जल्दी करना चाहते थे, वित्तीय सलाहकार की ये सलाह उस काम को अटकाने वाली थी। फाइल पर जो सलाह दी गई थी उसका मजमून कुछ इस प्रकार था "कार्यालय को स्थानांतरित करने के लिए कार्यालय कक्ष के आंतरिक सज्जा और सुविधाओं के परिप्रेक्ष्य में बाह्यय सज्जा के अध्ययधीन उक्त बातों का विश्लेषणात्मक विवेचन करने पर पाया गया कि कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रयोगात्मक (एक्सपेरिमेंटल) निर्णय भविष्य में आगे जाकर इस पर किया गया व्यय निरर्थक साबित होगा। "
अफसर तो अफसर हैं, निर्णय लेने में इतनी देर कहां लगाते हैं। सो बडे़ अफसर ने तुरंत फाइल पर वित्तीय सलाहकार को ही नौकरी से हटाने की सलाह दे डाली। दरअसल राजस्थान खाद्य आपूर्ति निगम का कार्यालय अभी राजस्थान स्टेट वेयर हाउसिंग के दफ्तर में चल रहा है। स्टेट वेयर हाउस वाले निगम से दफ्तर खाली करवाना चाहते हैं। इसके लिए लालकोठी स्थित किसान भवन में कार्यालय का स्थान लिया गया है। इस कार्यालय के लिए फर्नीचर, कम्प्यूटर, कुर्सी आदि की खरीद की जानी थी। इसमें सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर रखे गए वित्तीय सलाहकार से इस काम को जल्दी कैसे करवाया जाए, इस बारे में सलाह मांगी गई थी। वित्तीय सलाहकार की सलाह उन्हें ही भारी पड़ गयी। अब पॉवर गैलेरी में चर्चा है कि वित्त विभाग में रहकर सलाहकार अब तक काम अटकाने का ही काम करते रहे थे, सो अब आदत तो धीरे-धीरे ही बदलेगी। इसीलिए तो एकाउटेंट को अटकाउटेंट बोला जाता है। जय- जय राजस्थान।

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अच्छा आलेख लिखा है आपने!
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वर्ड-वेरीफिकेशन हटा दीजिए, इससे कमेंट करने में उलझन होती है!