Sunday, 5 June 2011

अफसरों की पदोन्नति में भी मैसेज की राजनीति

कुछ भी हो राजनेता जनता में मैसेज देने और पब्लिसिटी लेने का मौका कभी नहीं छोड़ते। भले ही सरकारी अफसरों को पदोन्नति देने का मामला ही क्यों न हो ? हाल ही राज्य सरकार ने एक साथ चार अफसरों को अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया है। जबकि सरकार के पास अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर की पोस्ट एक ही थी। अब तक होता यह आया है कि जैसे-जैसे पोस्ट खाली होती है तो अफसरों को पदोन्नत कर दिया जाता है, लेकिन सरकार ने अब अफसरों को पदोन्नत करने के साथ ही पोस्ट को अपग्रेड और डिग्रेड करने का फार्मूला अपनाया है। 
खैर हाल ही जो चार अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर पदोन्नत किए गए हैं उनमें दो सामान्य वर्ग और दो अनुसूचित जाति के हैं। पदोन्नति के लिए  तीन ही अफसरों के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें भी चूंकि जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव रामलुभाया को अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया जाना था, इसलिए वरिष्ठता में उनसे ऊपर आ रहे दो अन्य अधिकारियों ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव सी.एस. राजन और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव वी.एस. सिंह को भी पदोन्नति मिलनी जरूरी थी। जब मामला मुख्यमंत्री तक गया तो कला एवं संस्कृति प्रेमी आईएएस उमराव सालोदिया का नाम भी यह कहकर पहुंचाया गया कि सालोदिया को पदोन्नति देने से अनुसूचित जाति वर्ग में अच्छा संदेश जाएगा। सो मुख्यमंत्री ने सालोदिया को भी उनके साथ ही पदोन्नत कर दिया। 
पॉवर गेम में दूसरे पायदान पर आने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पीड़ा है कि जिस तरह से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को निर्धारित समय पर पदोन्नति मिलती है, भले ही पोस्ट हो या न हो। उसी तरह से राज्य सेवा के सभी अधिकारियों को भी निर्धारित समय पर पदोन्नति मिलनी ही चाहिए। इससे लिटिगेशन भी कम होगा और सरकार का कर्मचारियों में संदेश भी अच्छा जाएगा। इधर, राज्य कर्मचारियों का भी यही मत है कि जिस तरह से सरकार ने महंगाई भत्ता केन्द्र की घोषणा के साथ ही महंगाई भत्ता मिलने लगा है, उसी तरह टाइम बाउंड पदोन्नतियां भी कर देनी चाहिए। अब देखना है कि कर्मचारी और अधिकारी अपनी पदोन्नति संबंधी मांगों के मनवाने में कहां तक कामयाब होते हैं। जय जय राजस्थान।

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