Saturday, 4 June 2011

आईएएस बनना है तो जुगाड़ तकनीक अपनाओ

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से आईएएस बनने का ख्वाब देख रहे हैं। लेकिन उनका ये ख्वाब हकीकत में नहीं बदल पा रहा है। इसकी वजह इनमें सीनियरटी की लड़ाई है। इस लड़ाई का फायदा राज्य सेवा के अन्य अफसर उठा रहे हैं। कुछ तो आईएएस बनकर कलेक्टरी भी कर रहे हैं और आरएएस हैं कि अभी सीनियरटी ही तय नहीं कर पा रहे हैं।
अब फिर राज्य सेवा के तीन अफसरों को आईएएस बनने का मौका मिला है। इसके लिए उन्होंने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि पूर्व में 25 मई, 2011 रखी गई थी। इस दौरान 28 लोग आवेदन कर चुके थे। जबकि तीन पदों पर नियमानुसार 15 लोगों का ही पैनल बनाया जा सकता था। इसके बावजूद कुछ लोग और रह गए, जो आईएएस बनना चाहते थे। इन्होंने अपने वरिष्ठ साथियों से सलाह मशविरा किया कि वे अब आईएएस के लिए किस तरह पैनल में आ सकते हैं। सो उन्हें एक वरिष्ठ अफसर ने सलाह दी कि  आईएएस बनना है तो जुगाड़ तकनीक अपनाओ। सीधे मुख्य सचिव के पास जाओ और उनसे आग्रह करो कि वे आवेदन की तारीख बढ़वा दें। इन अफसरों को यह तकनीक रास आ गई और आवेदन करने की तारीख बढ़कर 10 जून, 2011 हो गई।
अब कार्मिक विभाग के अफसरों के माथे पर बल पड़े हुए हैं कि 3  पदों के लिए क्या 30 लोगों का पैनल जाएगा। यूपीएससी ने इस पर आपत्ति कर दी तो क्या होगा? कहीं ऐसा तो नहीं है कि आरएएस अफसर अपनी ही तरह राज्य सेवा के अन्य अधिकारियों को भी आपस में लड़वाना चाहते हों ताकि ये भी आईएएस नहीं बन पाएं।
जब भी राज्य की अन्य सेवाओं से आईएएस बनते हैं तो आऱएएस सेवा के अफसरों के सीने पर सांप लोटने लगता है। हाल ही एक अफसर की तो टिप्पणी थी कि अगर समय पर उनका प्रमोशन हो जाता तो वे भी आज कम से कम प्रमुख शासन सचिव होते। इस पर एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने उन्हें धीरज बंधाया कि चिंता मत करो, अब सरकार सुपर टाइम स्केल के आरएएस अफसरों को संभागीय आयुक्त लगाएगी। जय जय राजस्थान।

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