Thursday, 30 June 2011

नर्सिंग कालेज का प्राचार्य चार हजार रूपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा सोमवार को जनरल नर्सिंग कालेज, एस.के. अस्पताल सीकर के प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी को चार हजार रूपये कि रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। परिवादी, जो कि यहां ए.एन.एम. हैं, ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर परिवाद दर्ज करवाया। परिवादी जो कि जनरल नर्सिंग कालेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है। छात्रा ने सीकर ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई कि प्रथम वर्ष की परीक्षा देने से पूर्व कालेज के प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी ने उसे परीक्षा में उत्तीर्ण करवाने की एवज में एक रात संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा था। परीक्षा में उसके अनुत्तीर्ण हो जाने पर प्राचार्य ने उसे पुनः परीक्षा में पास कराने के लिए पुनः योन संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा। परिवादी ने प्राचार्य से कहा कि उसकी और दो साथी भी एक-एक नम्बर से फेल हो गई है, उन्हे भी पास कराना है। प्राचार्य ने दोनो लडकियों से 2000-2000 रूपये रिश्वत लेकर पास करवाने का आश्वासन दिया। अभियुक्त प्राचार्य ने परिवादी को इन दोनो लडकियों द्वारा दी जाने वाली रिश्वत राशि लेकर राणी सती मंदिर तिराहे पर बुलाया। यहां से प्राचार्य इस छात्रा को स्कूटी पर बैठाकर मंदिर के पास एक खाली मकान में ले गया। इन दोनो का पीछा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मूलचंद राणा एवं ब्यूरो टीम सीकर द्वारा किया जा रहा था। टीम द्वारा सूने मकान में प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी को 4000 रू. रिश्वत लेते हुये तथा ए.एन.एम., नर्सिंग छात्रा से अश्लील हरकते करते हुये धर दबोचा।
उक्त प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।

असिसटेन्ट प्रोफेसर पांच हजार रूपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राकेश शर्मा, असिसटेन्ट प्रोफेसर, साईन्स एंड टेक्नॉलोजी विभाग, वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय, कोटा को पांच हजार रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथो शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। डी.सी.जैन, महानिरीक्षक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर ने बताया कि परिवादी संदीप मालवीय पुत्र ज्ञानेश्वर मालवीय, दादाबाड़ी कोटा का कम्प्यूटर सप्लाई का काम है। संदीप मालवीय ने वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय को कम्प्यूटर सप्लाई किये थे, जिसका बिल 1,65,000/- का भुगतान करवाने की एवज में असिसटेन्ट प्रोफेसर द्वारा दस हजार रू. की मांग की।
इस पर परिवादी ने ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई जिसका सत्यापन सही पाया गया। ब्यूरो टीम कोटा द्वारा अभियुक्त राकेश र्श्मा, असिसटेन्ट प्रोफेसर को पांच हजार रू. की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है। पांच हजार की रिश्वत राशि अभियुक्त पूर्व में ले चुका था। उक्त प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।

Saturday, 25 June 2011

और अफसरों की नहीं चल पाई जुगाड़ तकनीक

राजस्थान प्रशासनिक सेवा को छोड़कर अन्य राज्य सेवाओं से आईएएस में चयन को लेकर इस बार सहकारिता विभाग के अफसरों की जुगाड़ तकनीक नहीं चल पाई। अब इन अफसरों ने अदालत की शरण ली है। इनकी वजह से आईएएस में चयन की प्रक्रिया ही फिलहाल रुक गई है। आईएएस के एक पद के लिए करीब 18 प्रत्याशी मैदान में हैं। 
हुआ यह कि सहकारिता विभाग से इस बार रजिस्ट्रार प्रेमसिंह मेहरा ने मैरिट के आधार पर मंजरी भांति, सुरेन्द्रसिंह और एस.के. बाकोलिया के नाम आईएएस के लिए भिजवाए थे। जबकि इनसे पहले जब आईएएस के तीन पद भरे गए थे, तब राजेन्द्र भट्ट, अशोक अय्यर और आर.एस. जाखड़ के नाम भिजवाए गए थे। इनमें जाखड़ आईएएस बन गए। इन लोगों का तर्क है कि आईएएस के लिए जब वे यूपीएसी तक हो आए थे, तो उनका दावा पहला बनता था, लेकिन अब उनके नामों की अभिशंषा नहीं करना उनके साथ अन्याय है। 
पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि भट्ट और अय्यर ने पिछली बार तो जुगाड़ तकनीक अपनाकर अपने नाम आईएएस के लिए विभाग से भिजवा लिए थे। इस बार रजिस्ट्रार ने नाम भेजने से पहले अफसरों की एसीआर, वरिष्ठता को आधार बनाकर मैरिट पर नाम भिजवाए थे। वैसे भी जब आईएएस के लिए नाम भेजे गए थे, तब रजिस्ट्रार छुट्टियों पर थे। अब देखना है कि इस पॉवरफुल पोस्ट के लिए कौन भारी पड़ता है। जय जय राजस्थान।



Friday, 24 June 2011

पीआरओ ने दर्ज कराया अतिरिक्त निदेशक के खिलाफ छुआछूत का मामला

पदोन्नति में आरक्षण मुद्दे से सरकारी कर्मचारियों में पनपी वर्ग- भेद की भावना का असर अब दिखने लगा है। सरकार के कारिंदे अब आरक्षित और अनारक्षित वर्गों में बंट गए हैं। इसी भावना के साथ काम करने लगे हैं। हाल ही  सूचना एवं जन संपर्क महकमे के एक जन संपर्क अधिकारी ने अपने ही विभागीय अतिरिक्त निदेशक के खिलाफ जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और गाली-गलौच करने का मामला पुलिस में दर्ज करवा दिया है। 
इसी विभाग में इसी तरह की एक और घटना चर्चा में है। इसमें अल्पसंख्यक वर्ग के एक पत्रकार ने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले संवाद के एक अधिकारी की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में कर दी। इन दोनों ही घटनाओं को पदोन्नति में आरक्षण मसले से जोड़कर देखा जा रहा है। इसकी वजह ये है कि अतिरिक्त निदेशक  के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले जनसंपर्क अधिकारी आरक्षण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अनुसूचित जाति के जिस अधिकारी के खिलाफ पत्रकार के माध्यम से शिकायत करवाई गई है, उसमें भी संबंधित अधिकारी विभाग के ही कुछ  सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर संदेह कर रहे हैं। 
इनके साथ ही कई अन्य विभागों में भी इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि जहां अनुसूचित जाति के अधिकारी उच्च पदों पर बैठे हैं, वहां सामान्य वर्ग के कनिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों को या तो चार्जशीट थमाई जा रही है अथवा उन पर छोटी-छोटी बातों को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है, ताकि आरक्षित वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। 
पॉवर गेलेरी के पॉवर फुल लोगों का मानना  है कि सरकार खुद वर्ग संघर्ष  को बढ़ावा दे रही है। आगे चलकर यह समस्या और भी विकराल हो सकती है। इसलिए सरकार को इस मसले पर जल्द फैसला करने की जरूरत है। 

Tuesday, 14 June 2011

वित्तीय सलाह देना भी भारी पड़ गया

राजस्थान खाद्य आपूर्ति निगम के वित्तीय सलाहकार को फाइल पर क्लिष्ट भाषा में सलाह देना भारी पड़ गया। फाइल की नोटशीट पर वित्तीय सलाहकार ने सलाह में जिस तरह की क्लिष्ट भाषा का इस्तेमाल किया, उसे पढ़कर बड़े अफसर का दिमाग चकरा गया। वे जिस काम को जल्दी करना चाहते थे, वित्तीय सलाहकार की ये सलाह उस काम को अटकाने वाली थी। फाइल पर जो सलाह दी गई थी उसका मजमून कुछ इस प्रकार था "कार्यालय को स्थानांतरित करने के लिए कार्यालय कक्ष के आंतरिक सज्जा और सुविधाओं के परिप्रेक्ष्य में बाह्यय सज्जा के अध्ययधीन उक्त बातों का विश्लेषणात्मक विवेचन करने पर पाया गया कि कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रयोगात्मक (एक्सपेरिमेंटल) निर्णय भविष्य में आगे जाकर इस पर किया गया व्यय निरर्थक साबित होगा। "
अफसर तो अफसर हैं, निर्णय लेने में इतनी देर कहां लगाते हैं। सो बडे़ अफसर ने तुरंत फाइल पर वित्तीय सलाहकार को ही नौकरी से हटाने की सलाह दे डाली। दरअसल राजस्थान खाद्य आपूर्ति निगम का कार्यालय अभी राजस्थान स्टेट वेयर हाउसिंग के दफ्तर में चल रहा है। स्टेट वेयर हाउस वाले निगम से दफ्तर खाली करवाना चाहते हैं। इसके लिए लालकोठी स्थित किसान भवन में कार्यालय का स्थान लिया गया है। इस कार्यालय के लिए फर्नीचर, कम्प्यूटर, कुर्सी आदि की खरीद की जानी थी। इसमें सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर रखे गए वित्तीय सलाहकार से इस काम को जल्दी कैसे करवाया जाए, इस बारे में सलाह मांगी गई थी। वित्तीय सलाहकार की सलाह उन्हें ही भारी पड़ गयी। अब पॉवर गैलेरी में चर्चा है कि वित्त विभाग में रहकर सलाहकार अब तक काम अटकाने का ही काम करते रहे थे, सो अब आदत तो धीरे-धीरे ही बदलेगी। इसीलिए तो एकाउटेंट को अटकाउटेंट बोला जाता है। जय- जय राजस्थान।

Wednesday, 8 June 2011

अफसर को लगा एसएमएस का रोग

मोबाइल फोन भी आजकल सुविधा के साथ-साथ बड़ी समस्या बनता जा रहा है। बड़े-बड़े अपराधी मोबाइल की कॉल डिटेल और टावर लोकेशन के आधार पर ही पकड़े जा रहे हैं। राजस्थान में दारासिहं फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में भी एनकाउंटर से जुड़े अफसरों की कॉल डिटेल और टावर लोकेशन ने उन्हें फंसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही राजस्थान के एक आरएएस अफसर को भी इसी तरह के हालात से रू ब रू होना पड़ा। 
दरअसल दो दिन पहले ही दौसा के एडीएम को राज्य सरकार ने अचानक रात को 10.30 बजे एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया। रात में अनावश्यक एडीएम को एपीओ करने की घटना ने खबरीलाल के कान खड़े कर दिए। पॉवर गेलेरी में इधर-उधर कारण सूंघने का प्रयास किया गया। पॉवर गेलेरी में भी एडीएम को हटाए जाने के कारणों को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। खबरीलाल को खबर मिली की एडीएम को एपीओ करने की आधिकारिक वजह तो प्रशासनिक ही बताई गई, जो सभी तरह के प्रकरणों में होती है। दौसा की पॉवर गेलेरी की खबर है कि एडीएम महोदय के फोन से किसी महिला मित्र को एसएमएस किए जा रहे थे, किसी गलतफहमी की वजह से ये एसएमएस किसी अन्य महिला के फोन पर पहुंच गए और उसने आलाकमान को शिकायत कर दी। शिकायत पर तुरंत एक्शन हो गया।
बात जब एसएमएस की चली तो एक वरिष्ठ आईएएस भी सतर्क हो गए। विभिन्न कंपनियों की ओर से आए दिन आने वाले अनावश्यक एसएमएस संदेशों को लेकर ये काफी परेशान थे। सो उन्होंने भी अपने पीए को तुरंत आदेश दिए कि उनके मोबाइल पर आने वाले अनावश्यक एसएमएस संदेशों को डीएनडी (डू नॉट डिस्टर्ब) सेवा का उपयोग करके तुरंत बंद कराया जाए।  जय जय राजस्थान ।
 

Sunday, 5 June 2011

अफसरों की पदोन्नति में भी मैसेज की राजनीति

कुछ भी हो राजनेता जनता में मैसेज देने और पब्लिसिटी लेने का मौका कभी नहीं छोड़ते। भले ही सरकारी अफसरों को पदोन्नति देने का मामला ही क्यों न हो ? हाल ही राज्य सरकार ने एक साथ चार अफसरों को अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया है। जबकि सरकार के पास अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर की पोस्ट एक ही थी। अब तक होता यह आया है कि जैसे-जैसे पोस्ट खाली होती है तो अफसरों को पदोन्नत कर दिया जाता है, लेकिन सरकार ने अब अफसरों को पदोन्नत करने के साथ ही पोस्ट को अपग्रेड और डिग्रेड करने का फार्मूला अपनाया है। 
खैर हाल ही जो चार अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर पदोन्नत किए गए हैं उनमें दो सामान्य वर्ग और दो अनुसूचित जाति के हैं। पदोन्नति के लिए  तीन ही अफसरों के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें भी चूंकि जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव रामलुभाया को अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया जाना था, इसलिए वरिष्ठता में उनसे ऊपर आ रहे दो अन्य अधिकारियों ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव सी.एस. राजन और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव वी.एस. सिंह को भी पदोन्नति मिलनी जरूरी थी। जब मामला मुख्यमंत्री तक गया तो कला एवं संस्कृति प्रेमी आईएएस उमराव सालोदिया का नाम भी यह कहकर पहुंचाया गया कि सालोदिया को पदोन्नति देने से अनुसूचित जाति वर्ग में अच्छा संदेश जाएगा। सो मुख्यमंत्री ने सालोदिया को भी उनके साथ ही पदोन्नत कर दिया। 
पॉवर गेम में दूसरे पायदान पर आने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पीड़ा है कि जिस तरह से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को निर्धारित समय पर पदोन्नति मिलती है, भले ही पोस्ट हो या न हो। उसी तरह से राज्य सेवा के सभी अधिकारियों को भी निर्धारित समय पर पदोन्नति मिलनी ही चाहिए। इससे लिटिगेशन भी कम होगा और सरकार का कर्मचारियों में संदेश भी अच्छा जाएगा। इधर, राज्य कर्मचारियों का भी यही मत है कि जिस तरह से सरकार ने महंगाई भत्ता केन्द्र की घोषणा के साथ ही महंगाई भत्ता मिलने लगा है, उसी तरह टाइम बाउंड पदोन्नतियां भी कर देनी चाहिए। अब देखना है कि कर्मचारी और अधिकारी अपनी पदोन्नति संबंधी मांगों के मनवाने में कहां तक कामयाब होते हैं। जय जय राजस्थान।

Saturday, 4 June 2011

आईएएस बनना है तो जुगाड़ तकनीक अपनाओ

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से आईएएस बनने का ख्वाब देख रहे हैं। लेकिन उनका ये ख्वाब हकीकत में नहीं बदल पा रहा है। इसकी वजह इनमें सीनियरटी की लड़ाई है। इस लड़ाई का फायदा राज्य सेवा के अन्य अफसर उठा रहे हैं। कुछ तो आईएएस बनकर कलेक्टरी भी कर रहे हैं और आरएएस हैं कि अभी सीनियरटी ही तय नहीं कर पा रहे हैं।
अब फिर राज्य सेवा के तीन अफसरों को आईएएस बनने का मौका मिला है। इसके लिए उन्होंने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि पूर्व में 25 मई, 2011 रखी गई थी। इस दौरान 28 लोग आवेदन कर चुके थे। जबकि तीन पदों पर नियमानुसार 15 लोगों का ही पैनल बनाया जा सकता था। इसके बावजूद कुछ लोग और रह गए, जो आईएएस बनना चाहते थे। इन्होंने अपने वरिष्ठ साथियों से सलाह मशविरा किया कि वे अब आईएएस के लिए किस तरह पैनल में आ सकते हैं। सो उन्हें एक वरिष्ठ अफसर ने सलाह दी कि  आईएएस बनना है तो जुगाड़ तकनीक अपनाओ। सीधे मुख्य सचिव के पास जाओ और उनसे आग्रह करो कि वे आवेदन की तारीख बढ़वा दें। इन अफसरों को यह तकनीक रास आ गई और आवेदन करने की तारीख बढ़कर 10 जून, 2011 हो गई।
अब कार्मिक विभाग के अफसरों के माथे पर बल पड़े हुए हैं कि 3  पदों के लिए क्या 30 लोगों का पैनल जाएगा। यूपीएससी ने इस पर आपत्ति कर दी तो क्या होगा? कहीं ऐसा तो नहीं है कि आरएएस अफसर अपनी ही तरह राज्य सेवा के अन्य अधिकारियों को भी आपस में लड़वाना चाहते हों ताकि ये भी आईएएस नहीं बन पाएं।
जब भी राज्य की अन्य सेवाओं से आईएएस बनते हैं तो आऱएएस सेवा के अफसरों के सीने पर सांप लोटने लगता है। हाल ही एक अफसर की तो टिप्पणी थी कि अगर समय पर उनका प्रमोशन हो जाता तो वे भी आज कम से कम प्रमुख शासन सचिव होते। इस पर एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने उन्हें धीरज बंधाया कि चिंता मत करो, अब सरकार सुपर टाइम स्केल के आरएएस अफसरों को संभागीय आयुक्त लगाएगी। जय जय राजस्थान।

और प्रमुख सचिव ने गुस्से में सेक्शन का फोन ही कटवा दिया

राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग का कम्प्यूटर सेल इन दिनों काफी चर्चा में है। चर्चा की वजह है कम्प्यूटर सेल का टेलीफोन का कट जाना। इस टेलीफोन कटने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। हालांकि आधिकारिक तौर पर तो यही कहा जा रहा है कि कम्प्यूटर सेल के लोग दिनभर विभिन्न अफसरों को फोन पर उनकी आयकर विवरणी, जांच और तबादले आदि के बारे में जानकारी देते रहते थे। इसी से नाराज होकर प्रमुख सचिव ने फोन को ही कटवा दिया।
 खबरीलाल की खबर है कि प्रमुख सचिव अपने विभाग के सभी सेक्शन पर बारीकी से नजर रखते हैं। समय-समय पर वे सेक्शन के लोगों की जानकारी भी लेते रहते हैं। चेक करने के लिहाज से ही उन्होंने कम्प्यूटर सेल में एक दिन दो-तीन बार फोन किया, लेकिन हर बार वहां का फोन व्यस्त आया। इससे नाराज होकर उन्होंने कम्प्यूटर सेल का फोन ही कटवा दिया। इससे पहले भी उन्होंने इसी तरह की एक शिकायत पर इसी सेल के फोन से जीरो डायलिंग सुविधा बंद करवा दी थी। अब कार्मिक विभाग का स्टाफ प्रमुख सचिव के तबादले की कामना कर रहा है, वहीं पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि सरकार प्रमुख सचिव को इससे खराब पोस्टिंग पर भला और कहां लगाएगी। यहां उनके लिए करने को तो कुछ है ही नहीं। सारा तो मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के यहां से होता है।  जय जय राजस्थान।