Tuesday, 17 May 2011

पेट्रोल ने लगाई टाटा के सपने में आग

इस देश में आम आदमी की बात तो छोड़िये, सपने देखने का हक शायद टाटा जैसे बड़े लोगों को भी नहीं है। सत्ता में बैठे मठाधीशों और अफसरों ने तय कर लिया है कि इंडिया में कोई भी सपना केवल वही देखेंगे और उसे पूरा करने का हक भी सिर्फ उन्हीं को है। सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपए  लीटर की बढ़ोत्तरी करके आम आदमी को फिर से साइकिल और दुपहिया वाहन पर ही चलने की ही हैसियत याद दिलाई है। 
टाटा ने लखटिया कार के रूप में नैनो की कल्पना करके आम आदमी के कार के सपने को पूरा करने की कोशिश की। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने बहुसंख्यक जनता के सपनों को उड़ान दी, लेकिन सरकार में बैठे लोगों को इसमें टाटा का धंधा ही नजर आया, सो तुरंत पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी। इतना ही नहीं आम आदमी को तो बस में सफर करने लायक भी नहीं छोड़ा जा रहा है, सो अब सरकार डीजल की दरें भी बढ़ाने के प्रयास में है। गैस के दाम बढ़ाकर उसके  निवाले की मात्रा भी कम की जाएगी। मंत्रियों, अफसरों के क्या फर्क पड़ने वाला है, पेट्रोल और डीजल भले ही 500 रुपए लीटर क्यों न हो जाए। उनका खर्च तो सरकारी खजाने से होना है। 
अब समझ नहीं आता कि एक तरफ तो देश में महंगाई तांडव कर रही है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है । रिजर्व बैंक के गर्वनर से लेकर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह तक चिंता व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल पर दाम बढ़ाए जा रहे हैं। इनके दाम बढ़ाने से क्या महंगाई कम हो जाएगी, या भ्रष्टाचार में कमी आएगी ? पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने से महंगाई बढ़ेगी। महंगाई बढ़ेगी तो भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि जिस अधिकारी अथवा नेता पर घोटाले के आरोप सिद्ध हो जाएं तो उसकी और उसके परिवार की पूरी संपत्ति जब्त करके सरकार के सुपुर्द कर दी जाए। विकास कार्यों में जिन इंजीनियरों, अफसरों की गलती पाई जाए अथवा ठेकेदार कंपनियों की गलतियां मिलें तो उनसे पूरी रकम की ब्याज सहित वसूली हो और भविष्य के लिए उन्हें सभी तरह के सरकारी कामकाज के लिए ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाए। 
स्विस बैंक के अधिकारियों ने खुलासा किया है कि उनके बैंकों में इंडिया का 280 लाख करोड़ रुपए जमा हैं। यह पैसा हमारी ही गाढी़ कमाई है, जो टैक्स चोर राजनेताओं और अफसरों ने वहां पर जमा कराया है। इतने पैसे का इस्तेमाल वे अपने जीवन में शायद ही कर पाएं। एक अनुमान के अनुसार 30 साल तक इंडिया को टैक्स रहित बजट दिया जा सकता है। हमारी केन्द्र सरकार को इन टैक्स चोरों के नाम तक बताने में शर्म आ रही है। फिर इस देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाने का सपना तो छोड़ ही दीजिए। क्यों नहीं इस पैसे को देश में लाकर आम आदमी के सपने को पूरा करने की कोशिश की जाए। लेकिन कोशिश तो तब होती है, जब कोई जिंदा हो, लेकिन इस देश का आम आदमी तो मरा हुआ है, वह अपने हकों के लिए बोलना और लड़ना तो सीखा ही नहीं है। वे बिरले तो अब इस दुनिया से ही चले गए जिन्होंने हिंदुस्तान की आजादी का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए अपनी कुर्बानी दे दी। अब तो इस देश में कुर्बानी देने वालों की नहीं बल्कि कुर्बानी लेने वालों की आबादी बढ़ रही है। जय जवान, जय किसान, जय हिंदुस्तान।


1 comment:

satyendra murli said...

Bhai sahab.... इस देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाने se aapka kya matlab hai...plz vistaar se bataiye....!