Tuesday, 17 May 2011

राजस्थान में पुलिस के पीछे पड़ी सीबीआई

राजस्थान में इन दिनों गुजरात जैसा नजारा है। यहां पुलिस के पीछे सीबीआई जो पड़ी है। अब तक अपराधियों को दौड़ाते रहे पुलिस के आला अफसर सीबीआई के डर से अब खुद दौड़ रहे हैं। फर्जी मुठभेड़ के मामले में एक आईपीएस पोन्नूचामी दो दिन की पुलिस कस्टडी में हैं, जबकि एडीजी ए.के. जैन और एडीशनल एसपी अऱशद अली सीबीआई को मिल नहीं रहे हैं। सीबीआई ने इनके लिए अदालत से गिरफ्तारी वारंट भी ले लिया है।
मुद्दा ये नहीं है कि फर्जी मुठभेड़ के मामले में पुलिस के आला अफसर फंसे हैं। मुद्दा ये है कि जब गिरफ्तारी होती है, अथवा खुद पुलिस की पूछताछ और जांच का सामना करना पड़ता है, तब कैसा अनुभव रहता है?  जो एडीशनल एसपी अरशद अली अब गिरफ्तारी के भय से भाग रहे हैं,  उन्हीं के निर्देशन में कुछ साल पहले पुलिस ने जयपुर में ही सात लोगों पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर हत्या जैसा वो जुर्म कबूल करवा लिया था, जो उन्होंने किया ही नहीं था। यानी सात जनों को एक जिंदा महिला की हत्या के आरोप में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। तब उन निर्दोषों को कैसा लगा होगा?
आईजी स्तर के अधिकारी पोन्नूचामी के वकील ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि उन्हें 5 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। जबकि पोन्नूचामी खुद जानते हैं कि उन्होंने अपने कैरियर में पूछताछ के नाम पर कितने लोगों को इस तरह से अवैध हिरासत में रखा। उन्हें या तो बाद में छोड़ दिया गया अथवा अदालत का दवाब आने पर गिरफ्तारी दिखाई गई। अभी तो गनीमत है कि आईजी साहब ने सीने में दर्द, कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत नहीं की है। अन्यथा बड़े लोगों में वीपी, डायबिटीज, सीने में दर्द, कमजोरी जैसी पुरानी बीमारियां अचानक उखड़ आती हैं।
फर्जी मुठभेड़ मामले में पकड़े गए अन्य पुलिस कर्मियों में से भी एक ने सीबीआई पर आरोप लगाया है कि उन पर राजनेता राजेन्द्र राठौड़ का नाम लेने के लिए दवाब डाला जा रहा है। उन्हें प्रताड़ित किया गया है। क्या पुलिस कर्मियों की इस कहानी पर आम जनता को भरोसा होगा?  जो खुद पुलिस की कार्य प्रणाली से आए दिन गुजरती हैं। पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि समय-समय की बात है एक वक्त वो भी था जब एडीजी जैन साहब की पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय, सचिवालय तक तूती बोलती थी। फिलहाल तो आला अफसरों की गिरफ्तारी पर नजर है, क्योंकि राजस्थान के एक आईपीएस मधुकर टंडन आज तक गिरफ्त से बाहर हैं, उन पर अपने ही अर्दली की पत्नी से ज्यादती करने का आरोप है। जय जय राजस्थान।

1 comment:

Hariish B. Sharma said...

वाह भाई साब! मजा आ गया। एक शानदार और बेबाक त्वरित टिप्पणी। तीखी और तेज। देखिये पुलिस थानों का तापमान बढ़ गया है। आप जैसे लोगों की वजह से पत्रकारिता आज भी सिर उठाकर जी रही है।