Monday, 21 February 2011

वसुंधराराजे का नेता प्रतिपक्ष बनना मुश्किल में

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे का फिर से नेता प्रतिपक्ष बनना खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। हालांकि  25 से 26 फरवरी तक नेता प्रतिपक्ष चुने की प्रक्रिया तय की जानी है। इसके लिए संभवतः विधायकों से दो - दो नाम मांगे जाएंगे। इनमें वसुंधराराजे का नाम छोड़कर दूसरों के नाम बताने को कहा जा सकता है। इसकी वजह ये है कि वसुंधराराजे खुद पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा को नेता प्रतिपक्ष बनवाना चाहती हैं। दूसरा नाम डॉ. दिगंबरसिंह का भी है, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दोनों ही भरतपुर जिले से संबंध रखते हैं। नंदलाल मीणा चूंकि आदिवासी इलाके से आते हैं, इसलिए उनके चांस ज्यादा हैं। हालांकि दूसरा खेमा पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को नेता प्रतिपक्ष देखना चाहता है। 
नेता प्रतिपक्ष के लिए वसुंधराराजे के दावा छोड़ने की वजह यह मानी जा रही है कि वे चुनावी वर्ष में राजस्थान की प्रदेशाध्यक्ष बनना चाहती हैं, ताकि वे टिकट बांटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना सके। मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी का कार्यकाल भी तब तक खत्म हो जाएगा। वैसे भी अरुण चतुर्वेदी अपने इस अध्यक्षीय कार्यकाल में कोई छाप नही छोड़ पाए हैं। वसुंधराराजे राजस्थान छोड़ना नहीं चाहती हैं। पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि चतुर्वेदी का भविष्य 5 मार्च को होने वाली प्रदेश कार्य समिति की बैठक पर निर्भर करेगा।

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