Sunday, 27 February 2011

समारोह में क्षेत्रीय विधायक की अनदेखी, साजिश या गलती

सिविल लाइंस से विधायक प्रतापसिंह खाचरियावास को सत्तापक्ष में असंतुष्ट खेमे में माना जाता है। खुलकर बेबाकी से अपनी बात रखना, उनकी आदत का हिस्सा है। यही आदत 24 फरवरी, 2011 को जयपुर मेट्रो के समारोह में उनकी अनदेखी करने का कारण बन गई।
हुआ यह कि इस दिन मानसरोवर में सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेट्रो परियोजना का शिलान्यास कार्यक्रम था। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ, मेट्रोमैन ई, श्रीधरन से लेकर कई नामी-गिरामी हस्तियां वहां आई हुई थीं। इस मेट्रो लाइन का ज्यादातर हिस्सा सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र से ही गुजरेगा। इस समारोह में औपचारिकता के नाते क्षेत्रीय विधायक खाचरियावास को आमंत्रित तो किया गया, लेकिन वक्ताओं की सूची में उनका नाम ही नहीं रखा।
जब खाचरियावास को इस बात का पता चला तो वे आग बबूला हो गए। मेट्रो जैसे ड्रीम प्रोजेक्ट में क्षेत्रीय विधायक को बोलने नहीं दिया जाए। ये कैसे हो सकता है? उम्मीद के मुताबिक ही हुआ, खाचरियावास ने वहीं विरोध दर्ज कराया और यहां तक कह दिया कि यदि उन्हें नहीं बोलने दिया गया तो वे यहीं मंच पर ही सारा खुलासा कर देंगे। उनकी इस नाराजगी से अफसरों के हाथ पांव फूल गए। वे करते भी क्या, जब तक ऊपर से आज्ञा नहीं हो तो वे अपने स्तर पर विधायक का नाम कैसे जोड़ते। आखिर मामला नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से होते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचा। मौके की नजाकत को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत वक्ताओं की सूची में खाचरियावास का नाम जोड़ने को कहा गया। नाम जुड़ा तो खाचरियावास खुश। इसके बाद तो उन्होंने मुख्यमंत्री, सरकार और नगरीय विकास मंत्री धारीवाल की तारीफों के जो पुल बांधे, उसका वर्णन इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि खाचरियावास से वैसी उम्मीद किसी को होती ही नहीं है।
खाचरियावास को उस व्यवस्था विरोधी तिकड़ी का हिस्सा माना जाता है जो भ्रष्टाचार, मंत्रियों के नाकारापन, अफसरों की तानाशाही और अन्य मुद्दों को लेकर सदन के अंदर और सदन के बाहर खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाती है। पॉवर गेलेरी में अब चर्चा है कि मेट्रो के समारोह में भले ही मामला शांत हो गया हो, लेकिन अंदर की चिंगारी अभी भी सुलग रही है। असंतोष की यह चिंगारी विधानसभा सत्र के पहले और बाद में कभी भी भड़क सकती है। इस चिंगारी को हवा देने के लिए सत्ता के गलियारों में बहुत सारे चेहरे घूम रहे हैं।

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