Thursday, 17 February 2011

नरेगा में चार हजार करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ?

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) में इस साल ढाई हजार करोड़ रुपए का ही खर्चा हुआ है। जबकि दो साल पहले इसी योजना में करीब साढ़े छह हजार करोड़ रुपए खर्च हुए थे। अफसर कहते हैं कि नरेगा योजना में सख्ती करने के कारण अब जरूरतमंद लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि  4 हजार करोड़ रुपए की राशि कहां गई। कहीं ऐसा तो नहीं सोशल ऑडिट में जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले सामने आए, ये पैसा भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया हो?
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले नरेगा के लिए न तो कोई निर्देशिका थी, न ही किसी तरह की गाइड लाइन। कलेक्टरों की परफोरमेंस भी इसी बात से आंकी जा रही थी कि कौन कितनी लेबर लगाता है। चूंकि नरेगा मांग आधारित योजना है, इसलिए इसे बजट के खर्चे से जोडक़र नहीं देखा जाना चाहिए। अब इसमें थोड़ी सख्ती की है, दिशा निर्देश बनाए हैं और गाइड लाइन जारी की है। वैसे भी अच्छा मानसून होने के कारण नरेगा में रोजगार की मांग में कमी आई है। चूंकि पहले ज्यादा सख्त नियम कायदे नहीं थे, इसीलिए सोशल ऑडिट में भ्रष्टाचार सामने आया था।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008-09 में जहां 6175.55 करोड़ रुपए खर्च करके 63.69 लाख परिवारों को रोजगार दिया गया था, वहीं वर्ष 2010-11 में खर्च घटकर 2582 करोड़ रुपए रह गया और रोजगार भी 55.09 परिवारों को ही मिला है। औसत मजदूरी 89 रुपए के बजाय 75 रुपए आ गई है, वहीं 100 दिन पूरे करने वाले परिवारों की संख्या भी 25.94 लाख परिवारों से घटकर 2.1 लाख ही रह गई है। इसके विपरीत जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या बढ़ी है।
किसान मजदूर शक्ति संगठन के निखिल डे का कहना है कि यहां उद्योग मैदान में हुए रोजगार मेले में 2 फरवरी को कई लोगों ने इस तरह की शिकायतें की थीं कि पंचायतों में नरेगा में रोजगार की अर्जी नहीं ली जा रही है। इस पर हालांकि सरकार ने डाकघर और राशन की दुकानों पर भी रोजगार के फार्म उपलब्ध कराए जाने के आदेश निकाले हैं, लेकिन वहां भी रसीद नहीं दी जा रही है। जब तक रोजगार मांगने वाले को रसीद नहीं मिलेगी तब तक उसका बेरोजगारी भत्ते का हक नहीं बनेगा। यह स्थिति तो तब बनी है, जबकि  केन्द्र में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग राजस्थान के ही सांसद सी.पी. जोशी के पास था।
अब तक केवल 17 लोगों को बेरोजगारी भत्ता : पूरे राज्य में अब तक केवल डूंगरपुर जिले में 17 लोगों को नरेगा के तहत बेरोजगारी भत्ता दिया गया है। इसे लेने में भी काफी जोर लगाना पड़ा। मजदूर-शक्ति संगठन के अनुसार पंचायतों में जब लोगों को रोजगार आवेदन की रसीद ही नहीं मिलेगी या फार्म ही नहीं लिए जाएंगे तो मजदूर को उसका हक कैसे मिलेगा? जबकि रोजगार की मांग पर आवेदन पत्र लेने के साथ ही रसीद दिए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
नरेगा में केवल 48 प्रतिशत फंड का ही उपयोग : ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अनुसार नरेगा में अभी तक केवल 48 प्रतिशत फंड का ही उपयोग किया जा सका है। इस फंड में 5373 करोड़ रुपए का बजट है, जबकि इसमें से मात्र 2582.51 करोड़ रुपए का ही खर्चा हुआ है।
महंगाई बढ़ी, मजदूरी घटी :  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि नरेगा का पैसा गांव तक गया तो लोगों की क्रय शक्ति बढ़ गई। इससे महंगाई भी बढ़ी। जबकि हकीकत यह है कि तीन पहले जहां औसत मजदूरी 89 रुपए थी, वहीं अब घटकर 75 रुपए रह गई है। इस पर भी प्रदेश की 3331 पंचायतें ऐसी हैं जहां एक पखवाड़े का, 502 ग्राम पंचायतों में एक महीने का, 42 में डेढ़ महीने और अलवर जिले की 2 पंचायतों मेें दो माह से नरेगा की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है।
सरकारी पोल खोलते आंकड़े :
विवरण :         2008-9  :     2009-10 :     2010-11 जॉबकार्ड धारी परिवार :     84.68          89.28        92.77 लाख
नियोजित परिवार         63.69 लाख    65.22 लाख    55.09 लाख
कुल मानव दिवस         4829.38     4498.08    2588.05 लाख
100 दिन पूरे करने वाले     25.94 लाख    17.63 लाख    2.1 लाख
औसत रोजगार प्र.परिवार     76 दिन         69 दिन        46 दिन
औसत मजदूरी         89 रु. प्र.दिन    87 रु. प्र.दिन     75 रु. प्रति.
औसत खर्च प्र. ग्रा.पं.     67 लाख रुपए     61 लाख रुपए     28.11 लाख रुपए     

नरेगा में सख्ती करने से गड़बडिय़ां रुकी हैं : भरतसिंह
अच्छे मानसून और रबी की अच्छी पैदावार की वजह से लोगों को दूसरी जगहों पर काम मिला है। निर्माण और अन्य उद्योगों में भी अच्छी मजदूरी मिलने से नरेगा में श्रमिकों की संख्या घटी है। यह मांग आधारित योजना है। काम मांगने पर रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें सरकार सफल रही है। मांगने के बावजूद किसी को काम नहीं मिला हो, ऐसे मामले मेरे सामने नहीं आए हैं।
- भरतसिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री

2 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

किसानों को मजदूर बनाओ. नरेगा में रजिस्टर्ड कराओ.. हर चीज का डिसेन्ट्रलाइजेशन हो रहा है. करप्शन का भी. सब खुश रहो... प्रधान भी खुश क्यों न हो..

सुशील बाकलीवाल said...

उत्तम प्रस्तुति...

हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसके आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । शुभकामनाओं सहित...
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