Sunday, 6 February 2011

इस जांच के पीछे आखिर खेल क्या है?

नगरीय विकास विभाग इन दिनों अजमेर में एक हाउसिंग सोसायटी को जमीन आवंटन के मामले की सेवानिवृत्त आईएएस से जांच करवा रहा है। इस अधिकारी  ने इससे पहले भी दिल्ली के एक ठेकेदार द्वारा आत्महत्या करने के मामले की भी जांच की थी। ठेकेदार ने बकाया बिलों के भुगतान करने के एवज में जेडीए और कोटा यूआईटी के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। ठेकेदार ने आत्महत्या करने से पहले इसकी सीडी भी सरकार को भेजी थी। इस सीडी के बावजूद जेडीए के एक अधिकारी को रिटायरमेंट के ठीक पहले जांच में क्लीनचिट दे दी गई।
अब अजमेर यूआईटी से जुड़ा यह मामला भी चर्चा में है। पॉवर गेलेरी में चर्चा का विषय इसलिए है क्योंकि इसकी गाज जांच से पहले ही दो अफसरों पर गिर चुकी है। प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के खेल के पर्चे छपकर बंट चुके हैं और 10 जनपथ तक भी भिजवाए गए हैं। इसमें शिकायत करने वाला व्यक्ति कांग्रेस से जुड़ा है और फायदा लेने वाले जिन लोगों का नाम इस मामले में आ रहा है, वे भी कांग्रेस से जुड़े हैं। फिर इस जांच के पीछे खेल क्या है? पॉवर गेम के माहिर खिलाड़ी इसका पता लगाने में जुटे हैं। इन लोगों के इस मामले में रुचि लेने की वजह यह भी बताई जा रही है कि अजमेर यूआईटी से जुड़े एक अधिकारी को हाल ही सीएमओ में पोस्टिंग मिली है तो एक अधिकारी को एपीओ कर दिया गया, जबकि तीसरे का तबादला कर दिया गया है? 

1 comment:

the third eye said...

दरअसल परचे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत का नाम है. दिग्गजों के भूमि घोटालों की वजह से धराशायी होने के दौर में खुद पर आंच आते देख गहलोत ने तुरंत भूमि का आवंटन रद्द कर दिया. अब जांच का औपचारिकता पूरी की जा रही है. बाकी जिस तरह से नियमों को ताक पर रख कर आवंटन रद्द किया है, और आदेश पर स्टे के बाद लगता ऐसा है कि होना जाना कुछ नहीं है.