Wednesday, 2 February 2011

किसी अफसर को फिल्म महंगी पड़ी तो किसी को बिल्डर का साथ

मुख्यमंत्री सचिवालय से राजस्थान प्रशासनिक सेवा के तीन अफसरों की एक साथ विदाई इन दिनों पॉवर गेलेरी में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। आईएएस, आरएएस अफसरों से लेकर सीएमओ और सचिवालय के कर्मचारी तक इस विदाई का रहस्य का पता लगाने में जुटे हैं। पॉवर गेलेरी के पॉवरफुल लोगों का मानना है कि संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है जब एक साथ तीन अफसरों को सीएमओ से विदाई दी गई हो। इसके साथ ही इस बात का भी आश्चर्य है कि इनमें से दो अफसरों को यदि सजा के तौर पर हटाया गया तो उन्हें अच्छी पोस्टिंग कैसे दी गई। अच्छी पोस्टिंग मिलने का जवाब किसी को नहीं सूझ रहा है।
पता चला है कि तीनों ही अधिकारी पॉवर गेलेरी के पॉवर गेम का शिकार हो गए। नगरीय विकास विभाग से सीधे सीएमओ में गए अफसर की पुलिस में खुफिया विभाग के ही एक आला अफसर ने रिपोर्ट दे दी कि उन्हें किसी महिला मित्र के साथ सिनेमा हॉल में फिल्म देखते हुए पाया गया। यह  मित्र राजनीति से भी जुड़ी हुई है और संभवतः उसे कोई प्रलोभन दिया गया था। बैक टू पवेलियन यानी परिवहन महकमे में लौटकर आए दूसरे अफसर को उन्हीं के साथियों ने शहर के एक बिल्डर का काम करवाने के लिए उन्हें साथ लेकर सरकारी दफ्तरों में जाते हुए देख लिया। बात दूर तलक चली गई और वे शिकार हो गए। ऊपर तक संदेश यह पहुंचाया गया कि जब सीएमओ का उप सचिव स्तर का अधिकारी ही किसी के साथ सरकारी दफ्तर में जाएगा तो उसका क्या असर होगा?
अब रहे तीसरे अफसर। उनके बारे में बताया गया कि चाचा ने ही भतीजे का शिकार करवा दिया। मामला अजमेर में जमीन से जुड़े एक प्रकरण से संबंधित था। हालांकि यह बात अलग है कि इस प्रकरण की गाज चाचा पर भी गिरी और वे भी मलाईदार पोस्ट से हटा दिए गए। इतना सब कुछ होने पर भी दो अफसरों को मलाईदार पोस्ट मिलने के बारे में बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने इमीडियेट बॉस को अच्छी पोस्टिंग के लिए मना लिया था, जबकि तीसरे बॉस को मैनेज नहीं कर पाए।

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