Tuesday, 18 January 2011

मंत्री से पंगा लेकर फंस गए जेडीए आयुक्त

जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त अपने ही मंत्री से पंगा लेकर फंस गए हैं। दीपावली और नव वर्ष के मौके पर जेडीए की ओर से पत्रकारों को कैश कार्ड बांटने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हालांकि मामले को दबाने के लिए जेडीए आयुक्त ने अपने स्तर पर जांच बिठा दी थी, लेकिन यह मानते हुए कि पूरे मामले में जेडीए आयुक्त की भूमिका संदिग्ध है, इसलिए नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने भी अलग से जांच बिठा दी है। उन्होंने यह जांच नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधू को दी है। धारीवाल का मानना है कि जेडीए से पत्रकारों को कैश कार्ड बिना आयुक्त की मर्जी के बंट जाएं, ये हो ही नहीं सकता। अपने से कनिष्ठ अधिकारी को जांच देकर जेडीए आयुक्त खुद जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं।
जेडीए आयुक्त की मंत्री और प्रमुख सचिव से पटरी नहीं बैठने का मामला इससे पहले भी कई मौकों पर जगजाहिर हो चुका है। इससे पहले अजमेर रोड़ पर मुर्गीखाने की जमीन को लेकर भी मंत्री ने जेडीसी के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया था। उससे पहले जेडीए आयुक्त के विदेश यात्रा पर चले जाने के बाद कुछ जेडीए फाइलें क्लीयर होने के बाद भी जेडीए आयुक्त द्वारा उन पर क्रियान्विति रोकने से मामला ज्यादा बढ़ गया था। पॉवर गैलेरी में अब यह चर्चा आम हो गई है कि जेडीए आयुक्त अब ज्यादा दिन के मेहमान नहीं हैं।

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