Wednesday, 12 January 2011

....तब तो राजस्थान सरकार को जवाब देना भारी पड़ जाता

पुलिस ने दो दिन पहले मुख्यमंत्री निवास पर आत्मदाह का प्रयास करने के आरोप में कई एनटीटी (नर्सरी ट्रेंड टीचर्स) छात्रों को गिरफ्तार किया। इस घटना ने मुख्यमंत्री निवास की सुरक्षा व्यवस्था और राज्य की इंटेलीजेंस की एक बार फिर पोल खोलकर रख दी। सुरक्षा एजेंसियों और इंटेलीजेंस को इस बात की भनक तक नहीं थी कि इन छात्रों ने सीएम हाउस के अंदर मुख्यमंत्री के सामने आत्मदाह करने की घटना को अंजाम देने की योजना बना ली थी। अगर समय रहते कुछ मीडिया कर्मी सुरक्षा कर्मियों और इंटेलीजेंस के लोगों को सतर्क नहीं करते तो।
दरअसल पुलिस ने जब इन एनटीटी छात्रों की तलाशी ली तो पता चला कि चार-पांच छात्र पेट्रोल से भरी प्लास्टिक थैलियां कपड़ों में छिपाकर सीएम हाउस के  अंदर तक भी ले गए थे। जहां मुख्यमंत्री आम लोगों से मिलकर जन सुनवाई करते हैं, वहां तक एक-एक करके कुछ छात्र पहुंच गए ताकि किसी को शक न हो। उस समय वहां करीब साढ़े तीन हजार की भीड़ थी। मुख्यमंत्री निवास पर सुरक्षाकर्मी केवल मेटल डिटेक्टर उपकरणों से आगंतुकों की जांच करते हैं। इसमें कपड़ों के अंदर छिपाई गई प्लास्टिक की थैलियां पकड़ में नहीं आई। इसलिए उन्होंने इन छात्रों को भी अंदर तक जाने दिया। बाद में जब सीएम हाउस के बाहर इनकी ज्यादा संख्या बढ़ी तो सुरक्षा कर्मियों और पुलिस की नींद उड़ी। अगर ये छात्र अपने मकसद में कामयाब हो जाते तो मौजूदा राज्य सरकार के चेहरे पर कालिख पुत जाती और जवाब देना तक भारी हो जाता।
यह घटना इसलिए और भी गंभीर तथा आश्चर्यजनक हो जाती है, क्योंकि इन्हीं एनटीटी छात्र-छात्राओं के मामले में इंटेलीजेंस पहले भी दो बार फेल हो चुकी है। पहली बार इंटेलीजेंस तब फेल हुई, जब जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शिक्षा संकुल के सामने गार्डन थियेटर का उदघाटन करने गए थे। तब एनटीटी की छात्राएं उनके काफिले के सामने आ गईं और जमकर नारेबाजी की थी। दूसरी बार इन्हीं एनटीटी छात्र-छात्राओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने प्रदर्शन किया। तब भी इंटेलीजेंस को इनकी योजना की भनक तक नहीं लगी थी। सीएम के मामले में भी इंटेलीजेंस की बार- बार हो रही ऐसी चूक कहीं कभी बड़े हादसे को जन्म न दे पाए, इसकी कामना की जानी चाहिए। दरअसल ये एनटीटी छात्र कई साल से सरकारी नौकरी के लिए आंदोलन कर रहे हैं। सरकार को भी गौर करना चाहिए कि जब युवा नौकरी के लिए आत्मदाह जैसे खतरनाक कदम उठाने को तैयार हो जाता है तो जरूर उसकी ऐसी मजबूरी रही होगी। इसे दवाब बनाने का प्रयास मात्र न मानकर उनसे वार्ता करके समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए। इससे पहले भाजपाराज में भी 2 सितंबर 2008 को एनटीटी के छात्र-छात्राएं शिक्षा संकुल पर लाठीचार्ज झेलना पड़ा था।