Wednesday, 22 December 2010

अब सरकारी महकमों में पदावनति का दौर शुरू

सरकारी महकमों में अब पदावनित का दौर भी शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अवमानना के डर से आबकारी विभाग में सरकार चार अफसरों का पदोन्नति आदेश वापस लिया जा चुका है। कार्मिक विभाग के निर्देश पर बुधवार को शिक्षा विभाग ने भी कई व्याख्याताओं को पदावनत कर दिया है। राज्य प्रशासनिक सेवा में भी कुछ अधिकारियों को तदर्थ रूप से दी गई पदोन्नति वापस लेने की तैयारी की जा रही है। इसका असर अन्य सेवाओं पर भी पड़ेगा। हालांकि आरएएस अफसर पूरा जोर लगाए हुए हैं कि उनकी पदोन्नति वापस नहीं हो, क्योंकि इनमें से एक दो लोग सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
पदोन्नतियों में आरक्षण को लेकर सरकार के सामने उलझन भरी स्थिति है। सामान्य वर्ग भी जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए दबाब बना रहे हैं। वहीं आरक्षित वर्ग के लोगों का कहना है कि नौकरियों में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, अनेक पदों पर बैकलॉग बना हुआ है, इसलिए पदोन्नतियों में उनका आरक्षण जारी रखा जाए।  हालांकि सरकार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर इसका कोई रास्ता निकालने के प्रयास में है। 

Sunday, 19 December 2010

पुलिस के आला अफसर चाहते हैं कमिश्नर प्रणाली टल जाए

 जयपुर और जोधपुर में पहला कमिश्नर बनने के लिए यूं तो पुलिस के आला अफसरों में जंग मची है। बड़े-बड़े पदों पर बैठे पुलिस अफसर अपनी-अपनी लॉबिंग में लगे हैं। परन्तु मलमास ने इन अफसरों की धड़कने बढ़ा दी हैं। अब ये अफसर कोशिशों में लगे हैं कि किसी भी तरह पुलिस कमिश्नर प्रणाली जनवरी तक टल जाए। सरकार ने अगर इससे पहले लागू कर दिया तो मलमास में ही ज्वाइन करना पड़ेगा, जो शुभ नहीं रहेगा।
राज्य सरकार जयपुर और जोधपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारियां पूरी कर चुकी हैं। कुछ नोटिफिकेशन हो चुके हैं, जबकि मुख्य नोटिफिकेशन होना बाकी है। पता नहीं सरकार कब कमिश्नर प्रणाली लागू कर दे, इस उम्मीद में कुछ पुलिस अफसरों ने तो नई वर्दी भी तैयार करवा ली है, जबकि कुछ अफसर ज्वाइनिंग का मुहूर्त दिखवाने में लगे हैं।
एडीजी और आईजी को लेकर है कवायदः  सरकार में फिलहाल कवायद यह चल रही है कि कहां किस स्तर के अधिकारी को कमिश्नर लगाया जाए। मोटे तौर पर जयपुर में एडीजी स्तर के अधिकारी को ही कमिश्नर लगाए जाने की संभावना ज्यादा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि दिल्ली में डीजी स्तर का अधिकारी कमिश्नर है अन्य शहरों में भी कमोबेश इसी स्तर के अफसर कमिश्नर हैं। जयपुर वैसे भी बड़ा शहर होने के साथ साथ राज्य की राजधानी भी है। गृहमंत्री शांति धारीवाल भी एडीजी स्तर के अधिकारी को ही जयपुर का कमिश्नर बनाए जाने के पक्ष में हैं। जबकि जोधपुर में आईजी स्तर के अधिकारी को ही कमिश्नर बनाया जाना तय है। इसके पीछे भी तर्क यही है कि जोधपुर अभी छोटा शहर है। पहले आईजी रेंज का अधिकारी कमिश्नर लगे, बाद में जरूरत दिखे तो पद को अपग्रेड किया जा सकता है। इस संबंध में कुछ लोग चाहते हैं कि जोधपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए वहां भी एडीजी स्तर का ही अधिकारी कमिश्नर बनाया जाना चाहिए।  इस बारे में फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होना है।

Saturday, 18 December 2010

महिला आरएएस अफसर को धमका रहे हैं केन्द्रीय मंत्री और डीजीपी

राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी गीतासिंहदेव को केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा, पुलिस महानिदेशक हरिश्चंद्र मीणा, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ओ.पी. मीणा से धमकियां मिल रही हैं। गीतासिंहदेव की नींद उड़ी हुई है। मानसिक तनाव की वजह से वे सरकारी काम भी सही से नहीं कर पा रही हैं। इस सबके बावजूद पुलिस में उनकी एफआईआर तक दर्ज नहीं हो रही है। इसके लिए वे एसपी से लेकर गृहमंत्री शांति धारीवाल तक गुहार लगा चुकी हैं। शिकायती पत्र पर क्या कार्रवाई हुई यह जानने के लिए भी उन्हें सूचना के अधिकार कानून का सहारा लेना पडा है।
बकौल गीतासिंह उनकी शादी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ओ.पी. मीणा से हुई थी। मीणा अभी खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रमुख सचिव और केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा, डीजीपी हरिश्चंद्र मीणा के भाई हैं। गीतासिंह का आरोप है कि पुत्र न होने की वजह से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। आए दिन उनसे मारपीट की जाती है और घर से बाहर निकाल दिया जाता है। गत 15 नवंबर को भी उनके साथ मारपीट की गई, जिससे हाथ में फ्रेक्चर आ गया। जब वे बनीपार्क थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने गई तो रिपोर्ट नहीं लिखी गई बल्कि सिपाही भेजकर उन्हें घर में रखवा दिया। बकौल गीतासिंह इस तरह की प्रताड़ना का यह सिलसिला उनके पिता जी. रामचंद्र के समय से ही चला आ रहा है। उनके पिता जी. रामचंद्र ने पहले भी तत्कालीन मुख्य सचिव अरुण कुमार नायर से कहकर इस मामले में हस्तक्षेप करवाया था।
गीतासिंह का आरोप है कि केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा, डीजीपी हरिश्चंद्र मीणा ने उन्हें फोन करके धमकाया कि कहीं भी शिकायत कर ले, कुछ नहीं होने वाला। सीएम क्या पीएम से भी मिल लो तो कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसी वजह से उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है। इधर, गीतासिंह की शिकायत वाली फाइल को डीजीपी हरिश्चंद्र मीणा ने गृह विभाग को यह कहकर लौटा दिया है कि इसकी जांच किसी दूसरी एजेंसी से करवाई जानी चाहिए।