Monday, 25 October 2010

दिल्ली में जगह तलाश रहे हैं राजस्थान के डीजीपी

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक एच.सी. मीणा ने अब अपने लिए दिल्ली में पोस्ट तलाशनी शुरू कर दी है। इसकी वजह, पिछले दिनों कलेक्टर-कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गृहमंत्री शांति धारीवाल से मिला फेल्योर पुलिस सिस्टम का सर्टिफिकेट है। पॉवर गेलेरी में इस सर्टिफिकेट की इन दिनों खूब चर्चा है। दरअसल कानून व्यवस्था पर समीक्षा के दौरान जब पुलिस महानिदेशक ने वर्ष 1999 से तुलना करते हुए राज्य में गंभीर अपराध घटने का दावा किया, तो मुख्यमंत्री नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक पुलिस की विफलताएं गिनानी शुरू कीं। उन्होंने कहा कि थाने के अंदर महिला सिपाही की बलात्कार के बाद हत्या हो जाए, ऐसा राजस्थान में पहले कभी हुआ है। पुलिस कंट्रोल रूम के सामने अपराधी नरमुंड काटकर डाल जाएं और पुलिस कुछ नहीं कर पाए, ऐसा आज से पहले कभी राजस्थान में हुआ है? फरार चल रहे डीआईजी स्तर के अधिकारी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाए, इससे ज्यादा शर्म की बात पुलिस के लिए हो सकती है? झालावाड़ के मनोहरथाना में आदिवासी युवती को उठाकर ले जाएं और बलात्कार होने के बाद गिरफ्तारी को लेकर हिंसक घटना हो जाए, क्या ये गंभीर बात नहीं हैं। क्या पुलिसिंग व्यवस्था है। अपराधियों में कही पुलिस का डर है? आप आंकड़े किसे बता रहे हैं?
इसी तरह गृहमंत्री शांति धारीवाल ने तो पुलिस की इंटेलीजेंस पर यह कहकर सवालिया निशान लगा दिया कि जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर एक कार्यक्रम में छात्राएं मुख्यमंत्री के सामने आकर प्रदर्शन कर जाएं, और पुलिस को इसकी भनक ही नहीं लगे, इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि इंटेलीजेंस कम्पलीट फेल्योर है। एसपी थानों का निरीक्षण नहीं करते। थानों में जनता की सुनवाई नहीं होती है। थाने भूमाफियाओं की शरणस्थली और प्रॉपर्टी डीलरों के दफ्तर बनकर रह गए हैं।
पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि इस तरह सार्वजनिक तौर पर अपमानित होने के बाद अब पुलिस महानिदेशक यहां से निकलने के मूड में हैं। इसके साथ ही डीजीपी की दौड़ में जुटे अफसरों ने जुगत बिठाना शुरू कर दिया है।

Wednesday, 20 October 2010

सरकार ने फेरा वर्ल्ड क्लास अरमानों पर पानी

राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी की गई तबादला सूची के बाद राजस्थान की पॉवर गेलेरी में कई रोचक किस्से चटखारे लेकर सुनाए जा रहे हैं। इस सूची में कई लोगों के अरमानों पर पानी फिरा, तो कुछ की लॉटरी  लग गई। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चोट तो आयोजना विभाग के राज्यमंत्री राजेन्द्र गुढ़ा के साथ हुई। गुढ़ा को हालांकि पर्यटन विभाग का भी राज्यमंत्री बनाया हुआ है, लेकिन इस विभाग में उनके लिए कोई काम नहीं है। उन्हें स्वतंत्र प्रभार देने के लिए पहले तो कई माह बाद आयोजना (जनशक्ति) विभाग बनाया गया। इसमें कई दिनों तक स्टाफ, डायरेक्टर ही नहीं लगा। पिछली तबादला सूची में वरिष्ठ आरएएस अधिकारी श्रीराम मीणा को निदेशक लगाया गया था। मीणा ने बैठने के लिए जैसे तैसे कमरे का जुगाड़ किया तो इस लिस्ट में उन्हें सिरोही का कलेक्टर लगा दिया गया। अब आयोजना जनशक्ति विभाग में निदेशक का पद फिर खाली हो गया है। इनके साथ ही दो और आरएएस अधिकारियों को धौलपुर और प्रतापगढ़ का कलेक्टर लगा दिया गया है। इसके विपरीत दौसा में कलेक्टर रह चुके एल.सी. असवाल ने जयपुर  नगर निगम में बड़े उत्साह से काम शुरू किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मिड डे मील कार्यक्रम का निदेशक बनाकर उनके वर्ल्ड क्लास अरमानों पर पानी फेर दिया। वैसे नगर निगम के कई अधिकारी और कर्मचारियों के मन में असवाल के तबादले से दीपावली के पटाखे अभी से फूट रहे हैं।
आरएएस अधिकारियों में जूनियर को बॉस बनाने से खफा चल रहे चेतन देवड़ा को इस सूची में भी राहत नहीं मिली है। उन्हें खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग से हटाया नहीं गया है। जबकि गृह विभाग के उप सचिव श्रीराम चौरड़िया को फिलहाल कुछ माह तक यहीं टिककर काम करने की सलाह दी गई है।
पत्रकार और कांग्रेस कार्यकर्ता से पंगा लेना नई नई आईएएस टीना सोनी को आखिर भारी पड़ गया। उन्हें माउंटआबू के एसडीएम पद से हटा दिया  गया। झालावाड़ के मनोहर थाना में आदिवासी युवती से बलात्कार की घटना के बाद हिंसा वहां के कलेक्टर पी. रमेश को भारी पड़ी। कलेक्टर कांफ्रेंस में ही मुख्यमंत्री के रुख से संकेत मिल चुके थे कि कलेक्टर एसपी पर गाज गिरने वाली है। इसी तरह का खामियाजा धौलपुर कलेक्टर वी. सरवन कुमार को भुगतना पड़ा। वहां एसपी सुरेन्द्र कुमार पर डकैतों से मिलीभगत के आरोप कलेक्टर कांफ्रेंस में लगे तो कलेक्टर को भी जाना पड़ा। वैसे भी बताया जा रहा है कि कलेक्टर और एसपी में छत्तीस का आंकड़ा था।
अब पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि जल्दी ही आईपीएस अफसरों की तबादला सूची और जारी होगी। इसमें कोटा, झालावाड़, धौलपुर, दौसा, प्रतापगढ़ जिलों के एसपी के साथ ही आईजी, डीआईजी स्तर के अधिकारियों पर राज की गाज गिर सकती है।

Thursday, 14 October 2010

वाणिज्यिक कर विभाग से हट सकते हैं दो तीन आरएएस अफसर

वाणिज्यिक कर विभाग में 9 आरएएस अफसरों को लगाए जाने से वाणिज्यिकर सेवा के अधिकारियों का विरोध अब सफल होता नजर आ रहा है। संभवतः सरकार आने वाली आरएएस अफसरों की तबादला सूची में वाणिज्यिक कर विभाग से 2- 3 अफसरों को वापस बुला लेगी। वाणिज्यिक कर सेवा के अधिकारी कुछ पदों पर हाईकोर्ट के फैसले की दलील देकर अपना दावा कर रहे हैं। इस बीच विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात 1985  बैच के अधिकारी वेदप्रकाश भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। विभागीय गेलेरी में चर्चा है कि वेदप्रकाश यहां लंबे समय से जमे हैं। पहले वे उपायुक्त प्रशासन के पद पर आए थे, अब उन्हें अतिरिक्त आयुक्त बना दिया गया है। संभवतः विभाग में वही सबसे पुराने आरएएस अधिकारी हैं। वेदप्रकाश चर्चा में इसलिए भी हैं क्योंकि वे जो जैसा चल रहा है, उसे चलने दो में विश्वास रखते हैं। साफ सुथरी, स्वच्छ और साधारण जीवन शैली की छवि वाले वेदप्रकाश के बारे में चर्चा है कि नवीनता में उनका विश्वास कम है और वे लकीर के फकीर बने रहने में ही ज्यादा विश्वास करते हैं।

राजस्थान रोडवेज में छुट्टी मंजूर करने पर बबाल

राजस्थान रोडवेज में पिछले दिनों बोर्ड के सचिव की छुट्टी मंजूर करने को लेकर ऐसा बवाल मचा कि आज तक चर्चा में है। हुआ यह कि बोर्ड के सचिव को अवकाश पर जाना था, सो उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया से अपना आवेदन भिजवा दिया। सामान्य प्रक्रिया में उनकी छुट्टी रोडवेज के एमडी डॉ. मंजीतसिंह ने मंजूर कर दी। चेयरमैन प्रदीपसेन को जब पता चला कि उनके सचिव की छुट्टी उनसे पूछे बिना ही मंजूर कर दी गई है, तो वे नाराज हो गए। नाराज भी इस कदर हुए कि बाकायदा पत्र लिखकर पूछ लिया कि बोर्ड के सचिव की छुट्टी मंजूर करने की शक्तियां किसके पास हैं। मामला यहां तक बढ़ा कि रोडवेज के रूल्स ऑफ बिजनेस तक दिखवाए गए। बाद में पता चला कि नियमों में अधिकांश अधिकार रोडवेज के एमडी को ही हैं। छुट्टियां मंजूर करने का अधिकार भी रोडवेज एमडी को ही है। इससे मामला एक बार तो शांत हो गया, लेकिन इसके बाद से रोडवेज के अधिकारियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। चेयरमैन की मीटिंग या चेयरमैन के बुलाने की सूचना मात्र से ही उनकी त्यौरियां चढ़ने लगती हैं। कई बार मीटिंगों में भी कुछ अधिकारियों को चेयरमैन के गुस्से का कोपभाजन बनना पड़ जाता है।

Tuesday, 12 October 2010

देवराजन को मिली सीबीआई से क्लीनचिट

भूमि संबंधी विवाद में भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी श्री एम.के. देवराजन को क्लीन चिट दे दी है। देवराजन 1977 के पुलिस अधिकारी हैं। आमेर में एक डीडराइटर श्रवणसिंह सामोता को पिछले दिनों भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पकड़ा था। इसमें यह बात सामने आई थी की सामोता सब रजिस्ट्रार आकाश रंजन के लिए रिश्वत लेता था। इसके बाद रंजन ने देवराजन पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। इस मामले में सीबीआई ने अब अदालत में डीडराइटर और रंजन के खिलाफ आरोप पत्र पेश करने की तैयारी कर ली है।
पत्नी के नाम से प्लॉट लेने के विवाद में पद के दुरुपयोग का आरोप लगने के बाद सरकार ने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीजी पद से हटाकर राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसिको) में सीएमडी लगा दिया था। पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि स्वच्छ और ईमानदारी छवि के देवराजन पर पद के दुरुपयोग का दाग धुलने से अब उनका अगले साल सम्मानजनक रिटायरमेंट हो सकेगा। इससे पहले देवराजन राजस्थान के पुलिस महानिदेशक के दावेदार थे।

पुलिस वालों के चक्कर में फंस गए कलेक्टर

जयपुर कलेक्टर नवीन महाजन राजधानी में आकर आखिर पुलिस वालों के चक्कर में फंस गए। हुआ यह कि कलेक्टर सम्मेलन में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर वैसे तो पुलिस वालों को ही अपने क्षेत्र की पोजीशन बतानी थी, लेकिन कलेक्टरों को भी उनकी मदद में कुछ कहने की इजाजत दी गई थी। इसी का फायदा जयपुर उत्तर के एसपी अशोक नरूका ने उठाया। नरूका दरअसल अपने इलाके में बूचड़खानों को लेकर काफी परेशान थे, लेकिन कहीं इससे मुख्यमंत्री नाराज न हो जाएं, सो उन्होंने यह मुद्दा धीरे से जयपुर कलेक्टर नवीन महाजन को सरका दिया। हुआ भी वहीं, कलेक्टर नवीन महाजन जब कलेक्टर कांफ्रेस में इस मुद्दे पर बोलने लगे तो सीएम ने एक बार उन्हें टोका कि यह एजेंडे का विषय नहीं है। आप एजेंडे पर बोले, फिर भी आपको लगता है कि ये समस्या है तो अलग से लिखकर भेज दें। इसके बाद भी महाजन अपनी बात कहते रहे। आखिर तंग आकर सीएम को उनसे कहना पड़ा कि आपका समय पूरा हो गया, आप बैठ जाइए।

Sunday, 3 October 2010

कौन चाहता है पंचायतराज संस्थाओं में भ्रष्टाचार रोकना

पंचायतराज संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए हाल ही सरकार ने पांच विभाग जिला परिषदों को हस्तांतरित किए हैं। केवल विभाग ही जिला परिषदों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और कृषि विभागों को फंड, फंक्शन एवं फंक्शनरीज के साथ ट्रांसफर किया है। इतना ही नहीं सरकार ने प्रभावी नियंत्रण के लिए १६ सीसीए जैसे माइनर पेनल्टी के अधिकार भी जिला परिषदों को दिए हैं। जिला परिषदों में आईएएस को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लगाने की मंशा भी जाहिर की गई है। आरएएस अधिकारियों को अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसीईओ) लगाया गया है। जबकि बाकी विभागों के अधिकारी इनके अधीन काम करेंगे।
राजस्थान पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि पंचायतराज संस्थाओं में खासकर नरेगा को लेकर भ्रष्टाचार के मामले जिस तरह से सामने आ रहे है, उन्हें रोके जाने की क्या व्यवस्था है? सोशियल ऑडिट का सरपंच और जन प्रतिनिधि ही विरोध कर रहे हैं। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी पर दंडात्मक कार्रवाई करनी है तो उसकी जांच की क्या व्यवस्था होगी? जिला स्तर पर इन विभागों और जिला परिषदों में समन्वय को लेकर भी परेशानी सामने आ सकती है। हो सकता है २० साल की सर्विस वाला डॉक्टर, अथवा आरएएस के समकक्ष योग्यता वाला कोई अफसर उसकी बात ही न सुने। ये भी हो सकता है कि जिला प्रमुख और सीईओ अगर मिल जाएं तो करप्शन रोकने की क्या व्यवस्था होगी। ऐसे में जब सभी विभागों में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) लगाए गए हैं तो प्रत्येक जिला परिषद स्तर पर एडीशनल एसपी स्तर अथवा एसपी स्तर के अधिकारी को सीवीओ क्यों नहीं लगा दिया जाता। इससे भ्रष्टाचार करने वालों में भी भय रहेगा और योजनाओं में भ्रष्टाचार पर सरकार की निगरानी भी रहेगी।

जूनियर को बॉस बनाने से आरएएस अफसर खफा

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को हाल ही जारी की गई तबादला सूची ने प्रशासनिक हल्कों में खलबली मचा दी है। हाल ही 1 अक्टूबर को जारी तबादला सूची का सीधा असर खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग पर पड़ा है। यहां पहले ही अफसरों का टोटा है और कोई अफसर आने को तैयार नहीं था। अब इस सूची में जेडीए में उपायुक्त प्रकाशचंद शर्मा को खाद्य विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर लगा दिया है। प्रकाशचंद शर्मा मौजूदा उपायुक्त चेतन देवड़ा से 5 साल जूनियर बताए जाते हैं। इससे देवड़ा खफा हो गए और उन्होंने नाराजगी प्रकट करने के लिए लंबी छुट्टियां ले ली  हैं। हालांकि देवड़ा पहले से ही इस विभाग से निकलने की जुगत लगा रहे थे।
इधर, हाल ही नवगठित स्टेट फूड कॉरपोरेशन में जाने के लिए कुछ आरएएस अफसर भी जुगत बिठाने में लगे हैं। महाप्रबंधक पद पर पहली नियुक्ति राजसिको की जीएम रजनीसिंह को दी गई है। जबकि फूड कॉरपोरेशन के एमडी ललित मेहरा यहां गृह विभाग के उप सचिव श्रीराम चौरडिया को भी लाने की जुगत बिठा रहे हैं। बुनकर संघ में एमडी के पद पर बैठे वेदप्रकाश भी अब वहां से निकलने के लिए छटपटा रहे हैं।

वाणिज्यिक सेवा के अफसरों में भी रोष
इधर, इससे पहले 30 सितंबर को जारी तबादला सूची में 7 आरएएस अधिकारियों को वाणिज्यिक कर विभाग में उपायुक्त पदों पर लगाए जाने से वाणिज्यिक कर सेवा के अधिकारियों में असंतोष हो गया है। इन अफसरों ने दो-तीन दिन पहले ही मीटिंग करके इन अधिकारियों को लगाए जाने का कड़ा विरोध भी किया है। इन अफसरों का कहना है कि हाईकोर्ट से विभाग में 6 से ज्यादा आरएएस अफसर लगाए जाने पर रोक है। इन पदों पर विभागीय अधिकारियों को लगाए जाने की मांग है। ताजा सूची से विभाग में कुल आरएएस अफसरों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। वाणिज्यक कर सेवा के अफसरो ने इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) को ज्ञापन देकर विरोध जताने का भी मन बना लिया है।