Saturday, 25 September 2010

पोस्टिंग लेने से बच रहे हैं आईएएस और आरएएस अफसर

राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में संभवतः यह पहला मौका है, जब खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में आईएएस और आरएएस अफसर पोस्टिंग से बच रहे हैं। जो विभाग में लगे हुए हैं उनमें से कुछ लोग यहां से निकल चुके हैं और जो बाकी बचे हैं वे निकलन के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। इसकी वजह केवल एक ही है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री बाबूलाल नागर के साथ पटरी नहीं बैठ पाना। उनके व्यवहार से भी अफसर इस कदर दुखी हैं कि वे इस विभाग में काम करने को कतई राजी नहीं है। हालांकि विभाग के केबिनेट मंत्री खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं, लेकिन वहां तक हर कोई अफसर अपनी बात कह पाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

दूसरी वजह यह भी है कि आटा पिसाई, शुद्ध के लिए युद्ध अभियान और पीली मटर की दाल के आयात में भ्रष्टाचार का ठप्पा लग चुका है। नाम भले ही राज्यमंत्री नागर का आ रहा हो, लेकिन रिकॉर्ड के हिसाब से तो अफसर ही फंसते हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच का सामना भी अफसरों को ही करना पड़ रहा है। राज्यमंत्री के व्यवहार के कारण राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ओ. पी। यादव, उपायुक्त अजय असवाल, गजानंद शर्मा पहले ही यहां से निकल चुके हैं। अब चेतन देवड़ा विभाग में रह गए हैं, जो पूरा कामकाज संभाले हुए हैं। देवड़ा भी यहां से जाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक अपनी बात पहले ही पहुंचा चुके हैं। विभाग के प्रमुख सचिव ओ. पी. मीणा भी इस पूरे मामले और मंत्री के व्यवहार को लेकर काफी व्यथित हैं। वे पहले ही सीएमओ को यहां से हटने के लिए आग्रह कर चुके हैं। पिछली तबादला सूची में उनका नाम भी था, लेकिन ऐनवक्त पर मीणा और कार्मिक सचिव खेमराज का नाम काट दिया गया। इसकी वजह ये है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद इस पक्ष में नहीं हैं कि खाद्य आपूर्ति जैसे विभाग को एकदम अफसरों से विहीन कर दिया जाए। क्योंकि नया अफसर आने को तैयार नहीं है। अतिरिक्त आयुक्त के पद के लिए पहले जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में उप सचिव आर.सी. सोलंकी का नाम सुझाया गया था, लेकिन जैसे ही पता चला तो सोलंकी ने जाकर मंत्री को मना कर दिया। उनके बाद अब गृह विभाग में उप सचिव श्रीराम चौरड़िया का नाम चला है, लेकिन वे भी वहां जाने के पक्ष में नहीं है। इस पद के लिए अभी तक किसी भी आरएएस अफसर ने हां नहीं भरी है। इसी तरह पहले यहां सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी गोविंद पारीक को लगाया गया था, लेकिन पारीक ने भी यहां आने से मना कर दिया।

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