Monday, 23 February 2009

आरएएस प्रमोशन प्रकरण प्राथमिकता से निबटाएंगे

जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरएएस अधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि उनकी पदोन्नति के प्रकरणों को सरकार प्राथमिकता से निबटाने का प्रयास करेगी। जरूरत पड़ी तो सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जाने को तैयार है। उन्होंने अफसरों से अपील की कि वे भी सरकार की मंशा के अनुरूप जवाबदेह और पारदर्शी शासन देने में सहयोग करें।
गहलोत ने रविवार को यहां राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद के विशेष अधिवेशन में कहा कि आरएएस अफसरों की आईएएस में अब तक पदोन्नति नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसके कारण भी सर्वविदित हैं। अधिकारियों को चाहिए कि वे आपस में बात करके कोई न कोई सर्वमान्य तरीका निकालें। यदि जरूरत पड़े और कोई सिस्टम तय होता हो तो सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जाने को तैयार है।
मुख्य सचिव डी. सी. सामंत ने भी कहा कि पदोन्नत नहीं होने का मामला वाकई गंभीर है। अधिवेशन के प्रारंभ में आरएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष यत्रमित्र सिंह देव ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आरएएस अधिकारियों को आईएएस में तदर्थ पदोन्नति का सुझाव देते हुए 76 पदों पर पदोन्नति की मांग की।
कई अधिकारी सम्मानित
आरएएस एसोसिएशन के प्रवक्ता पवन अरोडा ने बताया कि राजस्व मंडल में चयन होने पर एन. के. जैन, रामबिलास परमार, जी. के. तिवाड़ी, कर बोर्ड में चयनित होने पर ओ. पी. सहारण, सेवानिवृत्त होने पर जेठमल व्यास, कालूराम विश्नोई, बृजमोहन शर्मा, विशेष उपलब्धि पर डॉ. मोहनलाल यादव, मनोज शर्मा और राजपालसिंह चौहान को सम्मानित भी किया गया।
आरएएस अफसरों की मांगें
आईएएस के 58 खाली पद शीघ्र भरे जाएं। इसके लिए तदर्थ पदोन्नति दी जा सकती है, कम से कम 6 जिलों में आरएएस अफसरों को कलेक्टर बनाया जाए, विभागाध्यक्षों के 15 पदों पर आरएएस को नियुक्तियां, पदोन्नति में 5, 10, 15 साल की टाइम स्केल लागू की जाए, न्यायिक फैसलों की समीक्षा करके अनावश्यक कार्यवाही न की जाए, कनिष्ठ अधिकारियों को भी सर्किट हाउस में ठहरने की अनुमति मिले, कैडर की समस्याएं दूर करने के लिए कार्मिक विभाग के स्तर पर मासिक बैठक हों।

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