Sunday, 25 December 2011

हम भारतीयों के साथ 600 करोड़ का मजाक

यूनिक आईडेंटिटीफिकेशन नंबर योजना को करीब 600 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद संसदीय समिति ने खारिज कर दिया। हम भारतीयों के साथ इस साल का इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है? एक तरफ तो हम पर टैक्स पर टैक्स लादे जा रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है। आम आदमी के लिए परिवार पालना भी मुश्किल हो रहा है। दूसरी तरफ हमारे नेता और अफसर बेमतलब की योजनाओं में इतनी बड़ी रकम बर्बाद कर रहे हैं।
जब यूनिक आईडी योजना शुरू की गई थी तो दावा यह किया गया था कि इससे विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंकों में होने वाले लेन-देन में फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। हुआ इसका उलटा। बकौल दैनिक भास्कर पूर्वोत्तर राज्यों समेत कई शहरों में बांगलादेशी घुसपैठियों ने राशनकार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे प्रमाण-पत्रों के आधार पर यूनिक आईडी कार्ड बनवा लिए हैं। इससे देश की सुरक्षा को खतरा महसूस किया गया। इसी आधार पर संसदीय समिति ने भी इस योजना को खारिज कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि यूनिक आईडी योजना की जरूरत क्यों पड़ी? जबकि इससे पहले मतदाता पहचान-पत्रों को इसी उद्देश्य से बनाया गया था। इसमें मतदाता पहचान पत्र संख्या भी राष्ट्रीय स्तर पर जारी की गई थी। इसमें राष्ट्रीय, राज्य, शहर के कोड के साथ साथ बूथ तक का कोड नंबर दिया गया था। इसी डाटा को क्या ऑनलाइन करके यूनिक आईडी जैसी योजना से नहीं जोड़ा जा सकता था?  मतदाता पहचान पत्र के रिकॉर्ड को ही अपडेट नहीं करवाया जा सकता था? जबकि मतदाता सूची में नाम तभी जुड़ता है जब उपखंड स्तर का अधिकारी मतदाता की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का सत्यापन करवा लेता है। ऐसे में उसमें कुछ तो फर्जी पहचान पत्र बनने में नियंत्रण था। वैसे भी देश में 85 फीसदी से ज्यादा मतदाता पहचान पत्र बन चुके हैं। हर साल जनवरी में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण अभियान चलता ही है। प्रत्येक मतदाता का रिकॉर्ड ऑनलाइन भी मौजूद है। ऐसे में मतदाता की जानकारियां अपडेट करने में भी सरकार को ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता।
 मगर हमारे अफसरों और नेताओं की सोच तो हमेशा एक ही बिंदू पर काम करती है कि ऐसी क्या योजना बनाएं जिससे कमीशन के तौर पर उन्हें भी कुछ मिल जाए और बजट भी ठिकाने लग जाए। कुछ गड़बड़ हो तो इस देश की जनता को बोलने की आदत ही नहीं है। मसलन अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा ही लें तो पूरे देश में शोर मचा हुआ है। प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे मजबूत लोकपाल बिल की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार अपना लोकपाल बिल पास करने पर आमादा है। क्या मतदाता को यह जानने का हक नहीं है कि इस पर कितना पैसा खर्च होगा? मजबूत लोकपाल (चाहे अन्ना का हो या केन्द्र सरकार का ) क्या भ्रष्टाचार को खत्म कर पाएगा। जबकि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून, भारतीय दंड संहिता जैसे कानूनों के साथ मंत्रियों और अफसरों के लिए आचरण नियम, केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी),  सीबीआई,  राज्यों में लोकायुक्त जैसी व्यवस्थाएं पहले से ही मौजूद हैं। क्या इनमें से ही किसी एक संस्था को और अधिक मजबूत नहीं बनाया जा सकता। या फिर मजबूत लोकपाल आने के बाद क्या इन सभी व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया जाएगा?

हम किसी कानून में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं करते कि कोई सरकार अगर यूनिक आईडी जैसी योजनाएं बनाकर काफी पैसा खर्च होने के बाद उसे बंद या निरस्त करती है तो उसके लिए संबंधित मंत्री, राजनीतिक दल और अफसरों की जवाबदेही तय हो। ऐसी योजना में खर्च हुए धन की भरपाई संबंधित मंत्री-अफसरों की संपत्ति से वसूली करके की जानी चाहिए। जिम्मेदार मंत्री को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाए। अफसरों को सेवा से बर्खास्त करने के साथ ही उस पर जनता के धन की बर्बादी करने का मुकदमा चलाया जाए। इससे भी बढ़कर सरकार नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे, क्योंकि इस तरह के फैसले कैबिनेट की बैठक में ही किए जाते हैं।

Friday, 15 July 2011

आईएएस का हिसाब चुकता, भूल-चूक लेनी-देनी

गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में की गई एक आईएएस अफसर की विदेश यात्रा को वित्त विभाग ने नियमित तो कर दिया, लेकिन बिना बजट के।  ये आईएएस महोदय यात्रा नियमित होने पर सरकार से यात्रा भत्ते का भुगतान लेने की तैयारी किए बैठे थे। अब पॉवर गेलेरी में चर्चा है कि चूंकि विदेश यात्रा हो चुकी थी, इसलिए उसका तो कुछ हो नहीं सकता था, लेकिन बजट नहीं देकर सरकार ने आईएएस महोदय के करीब 1.50 से 2.00 लाख रुपए पर पानी फेर दिया। यदि वित्तीय स्वीकृति मिलती तो इतना भुगतान तो उनका बनता ही। यानी हिसाब चुकता, भूल-चूक लेनी देनी। 
हुआ यह कि आईएएस अधिकारी दामोदर शर्मा गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में बुनकर संघ के अध्यक्ष राधेश्याम तंवर और अन्य अफसरों के साथ फ्रेंकपर्ट की यात्रा करने गए थे। वहीं लगे हाथ दो -तीन और देशों की यात्रा भी कर आए, और यात्रा भी बिजनेस क्लास में की। लौटने पर आईएएस महोदय ने अधिक दिन की यात्रा को नियमित करने की अर्जी दे दी। तत्कालीन सरकार ने उस समय इस यात्रा को नियमित करने से इंकार कर दिया। परन्तु भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने जाते-जाते इस यात्रा को नियमित कर दिया। 
आईएएस महोदय को जैसे ही पता चला कि उनकी विदेश यात्रा को मुख्यमंत्री ने नियमित कर दिया है तो उन्होंने तुरंत  बिल पेश कर दिए। उद्योग विभाग में बैठे अधिकारी भी कुछ कम नहीं थे। उन्होंने मामला वित्त विभाग को भेज दिया। वित्त विभाग के अटकाऊटेंटों ने सरकार का हित देखते हुए तुरंत कह दिया कि  यात्रा को कार्मिक विभाग ने नियमित किया है, इसलिए वित्त विभाग भी बिना बजट के यात्रा को नियमित करता है। फाइल की ये नोटिंग सभी जगह से रूटीन में ही अनुमोदित होकर आ गई। आम लोगों के काम अटकाने वालों के काम कभी-कभी अटकते हैं, क्या फर्क पड़ता है।

Sunday, 3 July 2011

विधानसभा का सेक्शन ऑफिसर छाप रहा था नकली नोट

पौने नौ लाख रुपए के नकली नोट बरामद
जयपुर। विधानसभा में सेक्शन आफिसर के पद पर तैनात सुनील सिंह घर पर ही नकली नोट छाप रहा था। सदर थाना ने आरोपी को गिरफ्तार कर नकली नोट छापने की कलर प्रिंटर मशीन व अन्य सामान बरामद कर लिया। आरोपी एसओ ने आठ लाख 91 हजार रुपए के नकली नोट छाप कर चेक बाउंस के मामले में एक व्यक्ति दिए थे। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।
सदर एसीपी बजरंग सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सुनील सिंह(39) न्यू सांगानेर रोड स्थित रामपथ श्याम नगर निवासी है। सुनील सिंह का बैंक कर्मचारी सुरेश कुमार से चेक बाउंस के मामले में न्यायालय में विवाद चल रहा था। शनिवार को सुनील सिंह ने सुरेश कुमार के पास फोन कर समझौता करने के लिए न्यायालय में बुलाया और उसे एक बैग में आठ लाख 91 हजार रुपए तथा एक लाख रुपए का फर्जी चेक दे दिया।

इसके बाद वकील को फीस देने के लिए आरोपी ने रुपए निकाले तो नकली मिले। हजार हजार रुपए के सारे नोट एक ही नंबर के थे। इस पर पीडि़त सदर थाने पहुंच मामला दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी को शनिवार रात को पकड़कर पूछताछ की तो नकली नोट देने की बात कबूल कर ली। पूछताछ में कलर प्रिंटर से स्कैन कर प्रिंट लेकर देने की बात कही। पुलिस ने आरोपी के घर से कलर प्रिंटर बरामद कर लिया है। पूछताछ के लिए चार दिन के रिमांड पर लिया है।
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Friday, 1 July 2011

आरयूआईडीपी के अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

               बीसलपुर पेयजल परियोजना में ठेकेदार फर्म एल एंड टी को आपराधिक षड्यंत्र के तहत ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा राशि का अधिक भुगतान करने पर  राजस्थान अरबन इन्फ्रास्टक्चर डवलपमेंट प्रोजेक्ट (आरयूआईडीपी) के इंजीनियरों और अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
                जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें तत्कालीन मुख्य अभियंता मदनलाल, वरिष्ठ लेखाधिकारी सतीश गोयल, अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार जोशी, अधिशासी अभियंता एस.के. सोनी, सहायक अभियंता हुकुमचंद अग्रवाल, कनिष्ठ अभियंता दिनेश गुप्ता, सहायक लेखाधिकारी भरतसिहं, कनिष्ठ लेखाकार सुनील गोयल हैं।
             एल एंड टी कंपनी को इस काम का ठेका वर्ष 2006 में दिया गया था। इन अफसरों ने कंपनी के अधिकारियों से सांठगांठ करके अनुबंध की निर्धारित अवधि में कार्य करने पर अंडेंडम नं. 2 के फार्मूले से भुगतान कर दिया, जबकि यह भुगतान अंडेडम नं. 6 के अनुसार किया जाना था। पॉवर गेलेरी के पॉवरफुल अफसरों का कहना है कि कंपनी से इस राशि की वसूली हो जाएगी। इंजीनियरों का कुछ नहीं बिगड़ेगा। जय- जय राजस्थान।

http://acb.rajasthan.gov.in/


Thursday, 30 June 2011

नर्सिंग कालेज का प्राचार्य चार हजार रूपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा सोमवार को जनरल नर्सिंग कालेज, एस.के. अस्पताल सीकर के प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी को चार हजार रूपये कि रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। परिवादी, जो कि यहां ए.एन.एम. हैं, ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर परिवाद दर्ज करवाया। परिवादी जो कि जनरल नर्सिंग कालेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है। छात्रा ने सीकर ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई कि प्रथम वर्ष की परीक्षा देने से पूर्व कालेज के प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी ने उसे परीक्षा में उत्तीर्ण करवाने की एवज में एक रात संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा था। परीक्षा में उसके अनुत्तीर्ण हो जाने पर प्राचार्य ने उसे पुनः परीक्षा में पास कराने के लिए पुनः योन संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा। परिवादी ने प्राचार्य से कहा कि उसकी और दो साथी भी एक-एक नम्बर से फेल हो गई है, उन्हे भी पास कराना है। प्राचार्य ने दोनो लडकियों से 2000-2000 रूपये रिश्वत लेकर पास करवाने का आश्वासन दिया। अभियुक्त प्राचार्य ने परिवादी को इन दोनो लडकियों द्वारा दी जाने वाली रिश्वत राशि लेकर राणी सती मंदिर तिराहे पर बुलाया। यहां से प्राचार्य इस छात्रा को स्कूटी पर बैठाकर मंदिर के पास एक खाली मकान में ले गया। इन दोनो का पीछा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मूलचंद राणा एवं ब्यूरो टीम सीकर द्वारा किया जा रहा था। टीम द्वारा सूने मकान में प्राचार्य त्रिलोक चंद त्रिपाठी को 4000 रू. रिश्वत लेते हुये तथा ए.एन.एम., नर्सिंग छात्रा से अश्लील हरकते करते हुये धर दबोचा।
उक्त प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।